आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "posh"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "posh"
ग़ज़ल
हर्फ़ पर्दा-पोश थे इज़हार-ए-दिल के बाब में
हर्फ़ जितने शहर में थे हर्फ़-ए-ला होते गए
मुनीर नियाज़ी
ग़ज़ल
वो बरहनगी का क़सीदा कहते हुए इधर निकल आया था
मगर उस की आँखों में सत्र-पोश हया न हो कहीं यूँ न हो