aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chuntii"
वो सड़कों पे फूलों की धारी सी बनतीइधर से उधर से हसीनों को चुनती
मैं खिंचा तुझ से मगर तू मिरी राहों के लिएफूल चुनती रही चुनती रही चुनती ही रही
मैं इस रस्ते पर चलती हूँऔर अपने घर हो आती हूँ
धीमे धीमेसारी बिखरी चीज़ें चुनती जाए
किसी के लिए फूल चुनती नहीं होअँधेरे में कुछ याद करती नहीं हो
याद के दश्त मेंआँखें काँटे चुनती हैं
दश्त-ए-बे-रंग से दर्द के फूल चुनती हुई ज़िंदगीख़ौफ़-ए-वामांदगी से ख़जिल
ख़ूब चुनती है ज़मीं और दुआ देती है
वो सारे लफ़्ज़ लौट आतेवो आँसू चुनती रहती और
दर्द की किर्चें चुनती हूँतेरे पैरों की उँगलियाँ सहलाती हूँ
खेत में धूप चुनती हुई लड़कियाँ भीनई उम्र की सब्ज़ दहलीज़ पर हैं
मैं जब जब सिसकियाँ सुनती हूँअपनी किर्चियाँ चुनती हूँ
फूल चुनती रहीगीत गाती रही
कल वहाँ पे इक लड़की बे-तहाशा हैरत से तुम को अपनी आँखों में घूँट घूँट चुनती थीतुम जो सर झुका कर यूँ
छाँव बन कर मिरे साथ चलती रहीमौत मेरी सखी मेरी नब्ज़ों की वो राज़दाँ
खेत में धूप चुनती हुई लड़कियाँ भीनई उम्र की सब्ज़ दहलीज़ पर हैं मगर
पास ही इक नन्ही सी चिड़ियागिरे पड़े तिनके चुनती है!
जो सपने आँखें बुनती हैंवही किरची किरची चुनती हैं
ख़्वाब चुनती हुई आँखें हैं परिंदों की तरहऔर ये जिस्म कि जैसे कोई बे-बर्ग शजर
पुराने सज्दे चुनती हैपीले पाए दानों पर
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