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नज़्म
पहलू-ए-शाह में ये दुख़्तर-ए-जम्हूर की क़ब्र
कितने गुम-गश्ता फ़सानों का पता देती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
याद करते हुए इक यूसुफ़-ए-गुम-गश्ता को
कुछ दिनों रोई तो होगी मिरे घर की दीवार
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
तिरे साए में बचपन की सुहानी यादगारें हैं
हमारे अहद-ए-गुम-गश्ता के लम्हों की क़तारें हैं
अब्दुल अहद साज़
नज़्म
रंग-ओ-आब-ए-ज़िंदगी से गुल-ब-दामन है ज़मीं
सैकड़ों ख़ूँ-गश्ता तहज़ीबों का मदफ़न है ज़मीं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
अगले दिन हाथ हिलाते हैं पिछली पीतें याद आती हैं
गुम-गश्ता ख़ुशियाँ आँखों में आँसू बन कर लहराती हैं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मेरे जलते हुए सीने का दहकता हुआ चाँद
दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता का हँसता हुआ ख़ुश-रंग गुलाब
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
नून मीम राशिद
नज़्म
हज़ारों मील की दूरी पे तुम से आ गया और अब
दिनों सालों महीनों को इकट्ठा कर के गुम-गश्ता