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नज़्म
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
क़ासिम याक़ूब
नज़्म
लिखाने नाम सच्चे आशिक़ों में जब भी हम निकले
इरादों में हमारे जाने कितने पेच-ओ-ख़म निकले
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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लिखाने नाम सच्चे आशिक़ों में जब भी हम निकले
इरादों में हमारे जाने कितने पेच-ओ-ख़म निकले