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नज़्म
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
शहाब जाफ़री
नज़्म
एक ही ना-गहाँ लग़्ज़िश-ए-पा से यूँ लड़खड़ाया
कि मग़रिब के पाताल में मुँह के बल जा समाया
ख़ुर्शीद रिज़वी
नज़्म
तू अगर हर जगह है तो मेरा दिल क्यूँ ख़ाली है
दिल के अथाह पाताल में ढूँढता हूँ और तुझे पाता नहीं