चाहने वालो प्यार में थोड़ी आज़ादी भी लाज़िम है
देखो मेरा फूल ज़ियादा देख-भाल से टूट गया
परिंदे सब नहीं ज़िंदान में मारे गए हैं
क़फ़स में कुछ तो कुछ नक़्ल-ए-मकानी में मरे हैं
छेड़ती है मुझे आ आ के मिरी आज़ादी
गो मैं क़ैदी हूँ मिरे पाँव में ज़ंजीर भी है