सब आ चुके हैं जानने वाले सब आ चुके
मरते हुए से झूट कोई बोलता हुआ
झूट का डंका बजता था जिस वक़्त 'जमील' इस नगरी में
हर रस्ते हर मोड़ पे हम ने सच के अलम लहराए हैं
झूट था जो भी किया था मैं ने
और जो तुम ने कहा था क्या था
इक तरफ़ लोगों से सच कहने को बोला जा रहा है
इक तरफ़ कुछ झूटों की महफ़िल सजाई जा रही है