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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

नाज़ पर शेर

आइना देख के कहते हैं सँवरने वाले

आज बे-मौत मरेंगे मिरे मरने वाले

आईना देखकर सजने-सँवरने वाले यह बात कहते हैं।

आज जो लोग मेरी मौत चाहते हैं, वे खुद ही बेवक्त टूटकर मरेंगे।

यह शेर अपनी ख़ूबसूरती/रुतबे पर तंज़ भरे घमंड का इज़हार है। बोलने वाला कहता है कि जो लोग उसे नुकसान पहुँचाना या मरता देखना चाहते हैं, वे ईर्ष्या और जलन में खुद ही भीतर से खत्म हो जाएँगे। “बे-मौत मरना” यहाँ असली मौत नहीं, बल्कि जलन से घुटने और हार मान लेने का रूपक है। भाव में चुनौती और कटाक्ष है।

दाग़ देहलवी

हश्र तक बे-गुनही नाज़ करेगी मुझ पर

वो मिरा तेरी निगाहों में बुरा हो जाना

शाज़ तमकनत

ज़ब्त-ए-ग़म वुफ़ूर-ए-शौक़ और दिल-ए-ना-सुबूर-ए-इश्क़

मुझ को तो है ग़ुरूर-ए-इश्क़ आप को नाज़ हो हो

हयात अमरोहवी

नाज़ुकी क़ामत-ए-ज़ेबा की बयाँ क्या कीजे

पैरहन भी जहाँ उस्लूब-ए-नज़ाकत माँगे

इसहाक़ अतहर सिद्दीक़ी
बोलिए