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दाग़ देहलवी

1831 - 1905 | दिल्ली, भारत

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 79

शेर 176

ख़ार-ए-हसरत बयान से निकला

दिल का काँटा ज़बान से निकला

रूह किस मस्त की प्यासी गई मय-ख़ाने से

मय उड़ी जाती है साक़ी तिरे पैमाने से

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अयादत को मिरी कर वो ये ताकीद करते हैं

तुझे हम मार डालेंगे नहीं तो जल्द अच्छा हो

Visiting my sick bed she, makes this threat to me

I will kill you if you don't get well speedily

Visiting my sick bed she, makes this threat to me

I will kill you if you don't get well speedily

ई-पुस्तक 67

Aaftab-e-Dagh

 

1923

Aftaab-e-Dagh

 

1906

आफ़ताब-ए-दाग़

 

1906

आफ़ताब-ए-दाग़

दीवान-ए-दाेम

1959

आफ़ताब-ए-दाग़

खण्ड-002

1959

Ameer-o-Dagh Ke Kalam Ka Intikhab

 

1943

Ameer-o-Dagh Ki Nazuk Khayaliyan

 

Bahar-e-Dagh

 

1940

दाग़

 

1960

दाग़ देहलवी

हयात और कारनामे

1997

चित्र शायरी 27

वीडियो 75

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
मुमकिन नहीं कि तेरी मोहब्बत की बू न हो

दाग़ देहलवी

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Aae koi to baith bhi jaae

मलिका पुखराज

Aaj ki raat

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ताहिरा सैयद

Be-zabaanii zabaa.n na ho jaa.e

मलिका पुखराज

Iqbal Bano Tere Waaday ko Dagh Dehlvi

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Kiya hai deendar us sanam ko

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रुना लैला

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अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

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अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

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अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

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अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए

ताहिरा सैयद

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

शोभा गुर्टू

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

अज्ञात

आप का ए'तिबार कौन करे

शुमोना राय बिस्वास

आरज़ू है वफ़ा करे कोई

अज्ञात

इन आँखों ने क्या क्या तमाशा न देखा

अज्ञात

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

मेहदी हसन

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

बेगम अख़्तर

उन के इक जाँ-निसार हम भी हैं

ग़ुलाम अली

क्या तर्ज़-ए-कलाम हो गई है

अज्ञात

कहते हैं जिस को हूर वो इंसाँ तुम्हीं तो हो

अनीता सिंघवी

कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी

एजाज़ हुसैन हज़रावी

काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है

शुमोना राय बिस्वास

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

इक़बाल बानो

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

मुख़्तार बेगम

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

अज्ञात

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

शुमोना राय बिस्वास

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

ग़ुलाम अली

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

मेहदी हसन

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

मोहम्मद रफ़ी

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं

मलिका पुखराज

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

मेहदी हसन

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

ग़ुलाम अली

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

Urdu Studio

तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं

अज्ञात

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने

जगजीत सिंह

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

नूर जहाँ

दिल चुरा कर नज़र चुराई है

अज्ञात

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

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ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

इक़बाल बानो

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साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

मलिका पुखराज

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

फ़रीदा ख़ानम

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

राहत फ़तह अली

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

बेगम अख़्तर

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना

चंदन दास

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

उम्मीद अली ख़ान

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

ताहिरा सैयद

ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा

आबिदा परवीन

ऑडियो 1

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

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