नोस्टलजिया शायरी

गुज़रे हुए दिनों को याद करके छा जाने वाली उदासी कुछ मीठी सी होती। उस का ज़ायक़ा तो आपने चखा ही होगा। हमारा ये इन्तिख़ाब पढ़िए जो हम में से हर शख़्स के माज़ी की बा-ज़दीद करता है और गुज़रे हुए लम्हों की यादों को ज़िंदा करता है।