शम्अ शायरी

शमा रात भर रौशनी लुटाने के लिए जलती रहती है, सब उस के फ़ैज़ उठाते हैं लेकिन उस के अपने दुख और कर्ब को कोई नहीं समझता। किस तरह से सियाह काली रात उस के ऊपर गुज़रती है उसे कोई नहीं जानता। तख़्लीक़ कारों ने रौशनी के पीछे की उन तमाम अन-कही बातों को ज़बान दी है। ख़याल रहे कि शायरी में शमा और पर्वाना अपने लफ़्ज़ी मानी और माद्दी शक्लों से बहुत आगे निकल जिंदगी की मुतनव्वे सूरतों की अलामत के तौर मुस्तामल हैं।