aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
हम न कहते थे कि नक़्श उस का नहीं नक़्क़ाश सहल
चाँद सारा लग गया तब नीम-रुख़ सूरत हुई
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर यहाँ प्रेमिका के सौंदर्य को इतना ऊँचा बताते हैं कि उसे पूरी तरह दिखाना किसी के बस में नहीं। “चित्रकार” हर उस कोशिश का रूपक है जो सौंदर्य को कला या शब्दों में बाँधना चाहती है। पूरा चाँद लगाने पर भी केवल आधा चेहरा बनना अतिशयोक्ति है, जो बताती है कि यह सुंदरता बयान से परे है। भाव में विस्मय और हल्की-सी जीत का अहसास है।
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Rekhta AI
मीर तक़ी मीर यहाँ प्रेमिका के सौंदर्य को इतना ऊँचा बताते हैं कि उसे पूरी तरह दिखाना किसी के बस में नहीं। “चित्रकार” हर उस कोशिश का रूपक है जो सौंदर्य को कला या शब्दों में बाँधना चाहती है। पूरा चाँद लगाने पर भी केवल आधा चेहरा बनना अतिशयोक्ति है, जो बताती है कि यह सुंदरता बयान से परे है। भाव में विस्मय और हल्की-सी जीत का अहसास है।
"इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़्फ़त हुई तोहमत हुई" ग़ज़ल से की मीर तक़ी मीर