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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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झगड़े रहा किए दिल-ए-शोरीदा-सर के साथ

रियाज़ हसन खाँ ख़याल

झगड़े रहा किए दिल-ए-शोरीदा-सर के साथ

रियाज़ हसन खाँ ख़याल

MORE BYरियाज़ हसन खाँ ख़याल

    झगड़े रहा किए दिल-ए-शोरीदा-सर के साथ

    दुश्वार हो गया सफ़र उस हम-सफ़र के साथ

    नेकी बदी है रोज़-ए-अज़ल से बशर के साथ

    इंसान का ख़मीर बना ख़ैर-ओ-शर के साथ

    दिल की भी ख़ैर माँग रहा हूँ जिगर की भी

    दोनों की ताक में हैं वो तिरछी नज़र के साथ

    हिर-फिर के क्यों आए मिरे दिल में उस की नाज़

    होता है उन्स सब को ज़रूर अपने घर के साथ

    सैल-ए-अश्क ख़ाना-ए-दुश्मन भी पास है

    क्यों तुझ को बुग़्ज़ है मिरी दीवार-ओ-दर के साथ

    चौरंग काटती है वो तेग़-ए-निगाह-ए-नाज़

    अरमानों का भी ख़ून हुआ दिल जिगर के साथ

    कल जिस गली में खो चुके दिल फिर वहीं चले

    दिल-बस्तगी कुछ ऐसी है उस रहगुज़र के साथ

    हमराह-ए-ख़िज़्र जा के सिकंदर को क्या मिला

    क़िस्मत है हर बशर की जुदा हर बशर के साथ

    जब तक ये दिल है दिल से जाएगा तेरा इश्क़

    जब तक ये सर है ज़ुल्फ़ों का सौदा है सर के साथ

    फ़र्द-ए-गुनह को धोएँगे ये अश्क-ए-इंफ़िआल

    वाबस्ता है उमीद मिरी चश्म-ए-तर के साथ

    क्या ख़्वाब में वो काकुल-ए-मुश्कीं बिखर गईं

    आई जो बू-ए-मुश्क नसीम-ए-सहर के साथ

    हमराह वो रक़ीबों के निकला है सैर को

    सौ फ़ित्ने हम-रिकाब हैं उस फ़ित्ना-गर के साथ

    क्या जाने ले चला है हमें जोश-ए-बे-ख़ुदी

    रहज़न के साथ जाते हैं या राहबर के साथ

    क्या मुझ को उस के वा'दा-ए-मशरूत की ख़ुशी

    अह्द-ए-वफ़ा किया है मगर और अगर के साथ

    धोका है आक़िबत का ब-क़ौल-ए-सबा 'ख़याल'

    अंजाम हो ब-ख़ैर कि शर है बशर के साथ

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