इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी

निदा फ़ाज़ली

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निदा फ़ाज़ली

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    This ghazal is written on similar kinds of social issues prevailing both in India and Pakistan.

    इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी

    अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी

    ख़ूँ-ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं

    हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी

    हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से

    इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी

    रहमान की रहमत हो कि भगवान की मूरत

    हर खेल का मैदान यहाँ भी है वहाँ भी

    उठता है दिल-ओ-जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही

    ये 'मीर' का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी

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    अज्ञात

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    स्रोत:

    • पुस्तक : Sheher Men Gaon (पृष्ठ 380)
    • रचनाकार : Nida Fazli
    • प्रकाशन : Miaar Publications (2012)
    • संस्करण : 2012

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