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मदह

MORE BYफ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    रोचक तथ्य

    (The late Hussain Shaheed Suhrawardi had advocated in the Rawalpindi "conspiracy" case on behalf of the accused) This letter of thanks was presented to him at the end of the trial.

    (1)

    कस तरह बयाँ हो तिरा पैराया-ए-तक़रीर

    गोया सर-ए-बातिल पे चमकने लगी शमशीर

    वो ज़ोर है इक लफ़्ज़ इधर नुत्क़ से निकला

    वाँ सीना-ए-अग़्यार में पैवस्त हुए तीर

    गर्मी भी है ठंडक भी रवानी भी सकूँ भी

    तासीर का क्या कहिए है तासीर ही तासीर

    एजाज़ उसी का है कि अर्बाब-ए-सितम की

    अब तक कोई अंजाम को पहुँची नहीं तदबीर

    अतराफ़-ए-वतन में हुआ हक़ बात का शोहरा

    हर एक जगह मक्र-ओ-रिया की हुई तश्हीर

    रौशन हुए उम्मीद से रुख़ अहल-ए-वफ़ा के

    पेशानी-ए-आदा पे सियाही हुई तहरीर

    (2)

    हुर्रियत-ए-आदम की रह-ए-सख़्त के रह-गीर

    ख़ातिर में नहीं लाते ख़याल-ए-दम-ए-ताज़ीर

    कुछ नंग नहीं रंज-ए-असीरी कि पुराना

    मर्दान-ए-सफ़ा-केश से है रिशता-ए-ज़ंजीर

    कब दबदबा-ए-जब्र से दबते हैं कि जिन के

    ईमान यक़ीं दिल में किए रहते हैं तनवीर

    मालूम है उन को कि रिहा होगी कसी दिन

    ज़ालिम के गिराँ हाथ से मज़लूम की तक़दीर

    आख़िर को सर-अफ़राज़ हुआ करते हैं अहरार

    आख़िर को गिरा करती है हर जौर की तामीर

    हर दौर में सर होते हैं क़स्र-ए-जम-ओ-दारा

    हर अहद में दीवार-ए-सितम होती है तस्ख़ीर

    हर दौर में मलऊन शक़ावत है 'शिमर' की

    हर अहद में मसऊद है क़ुर्बानी-ए-शब्बीर

    (2)

    करता है क़लम अपने लब नुत्क़ की ततहीर

    पहुँची है सर-ए-हरफ़-ए-दुआ अब मिरी तहरीर

    हर काम में बरकत हो हर इक क़ौल में क़ुव्वत

    हर गाम पे हो मंज़िल-ए-मक़्सूद क़दम-गीर

    हर लहज़ा तिरा ताले-ए-इक़बाल सिवा हो

    हर लहज़ा मदद-गार हो तदबीर की तक़दीर

    हर बात हो मक़्बूल, हर इक बोल हो बाला

    कुछ और भी रौनक़ में बढ़े शोल-ए-तक़रीर

    हर दिन हो तिरा लुत्फ़-ए-ज़बाँ और ज़ियादा

    अल्लाह करे ज़ोर-ए-बयाँ और ज़ियादा

    स्रोत :
    • पुस्तक : Nuskha Hai Wafa (Kulliyat-e-Faiz) (पृष्ठ 570)
    • प्रकाशन : Educational Publishing House (2009)
    • संस्करण : 2009
    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

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