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अली जव्वाद ज़ैदी

1916 - 2004 | लखनऊ, भारत

प्रसिद्ध शायर और आलोचक, अपनी आलोचना की पुस्तक ‘दो अदबी स्कूल’ के लिए भी जाने जाते हैं

प्रसिद्ध शायर और आलोचक, अपनी आलोचना की पुस्तक ‘दो अदबी स्कूल’ के लिए भी जाने जाते हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

ग़ज़ल 35

शेर 26

ऐश ही ऐश है सब ग़म है

ज़िंदगी इक हसीन संगम है

जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन था

वो हौसले ज़माने के मेयार हो गए

अब दर्द में वो कैफ़ियत-ए-दर्द नहीं है

आया हूँ जो उस बज़्म-ए-गुल-अफ़्शाँ से गुज़र के

ये दुश्मनी है साक़ी या दोस्ती है साक़ी

औरों को जाम देना मुझ को दिखा दिखा के

लज़्ज़त-ए-दर्द मिली इशरत-ए-एहसास मिली

कौन कहता है हम उस बज़्म से नाकाम आए

रेखाचित्र 1

 

पुस्तकें 65

अाप से मिलिये

 

1963

अकाडमी

Shumara Number-001

1981

Ali Jawwad Zaidi

 

2012

Anees Ke Salam

 

1981

Anwar-e-Abul Kalam

 

1959

Dehlvi Marsiya Go

Volume-002

1987

देहलवी मर्सिया गो

खण्ड-001

1986

Diyar-e-Sahar

 

1960

Do Adabi School

 

1980

Do Adabi School

 

1970

ऑडियो 10

आँख कुछ बे-सबब ही नम तो नहीं

उफ़ वो इक हर्फ़-ए-तमन्ना जो हमारे दिल में था

ऐश ही ऐश है न सब ग़म है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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