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अम्बर शमीम

ग़ज़ल 3

 

शेर 4

ख़्वाब आँसू एहतजाजी ज़िंदगी

पूछिए मत शहर-ए-कलकत्ता है क्या

साएबाँ क्या अब्र का टुकड़ा है क्या

धूप तो मा'लूम है साया है क्या

धूप काफ़ी दूर तक थी राह में

लम्हा लम्हा हो गया पैकर सियाह

पुस्तकें 1

दस्तक

Shumara Number-002

1994