संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल46
नज़्म17
शेर32
ई-पुस्तक43
चित्र शायरी 23
ऑडियो 31
वीडियो19
क़ितआ32
गेलरी 15
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फ़िल्मी गीत1
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल 46
नज़्म 17
अशआर 32
ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
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लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
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सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी
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अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
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और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह
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क़ितआ 32
फ़िल्मी गीत 1
पुस्तकें 43
चित्र शायरी 23
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