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जाँ निसार अख़्तर

1914 - 1976 | मुंबई, भारत

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर और फ़िल्म गीतकार। फ़िल्म गीतकार जावेद अख़्तर के पिता

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर और फ़िल्म गीतकार। फ़िल्म गीतकार जावेद अख़्तर के पिता

जाँ निसार अख़्तर

ग़ज़ल 46

नज़्म 17

अशआर 31

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें

इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से

तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ

दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी

तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें

कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

क़ितआ 30

पुस्तकें 44

चित्र शायरी 23

वीडियो 20

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए

जाँ निसार अख़्तर

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो

जाँ निसार अख़्तर

तुलू-ए-सुब्ह है नज़रें उठा के देख ज़रा

जाँ निसार अख़्तर

हम ने काटी हैं तिरी याद में रातें अक्सर

जाँ निसार अख़्तर

ऑडियो 31

अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

अच्छा है उन से कोई तक़ाज़ा किया न जाए

अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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