Wali Mohammad Wali's Photo'

वली मोहम्मद वली

1667 - 1707 | गुजरात, भारत

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

वली मोहम्मद वली

ग़ज़ल 40

अशआर 25

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

उसे ज़िंदगी क्यूँ भारी लगे

याद करना हर घड़ी तुझ यार का

है वज़ीफ़ा मुझ दिल-ए-बीमार का

चाहता है इस जहाँ में गर बहिश्त

जा तमाशा देख उस रुख़्सार का

मुफ़लिसी सब बहार खोती है

मर्द का ए'तिबार खोती है

दिल-ए-उश्शाक़ क्यूँ हो रौशन

जब ख़याल-ए-सनम चराग़ हुआ

पुस्तकें 27

वीडियो 6

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो
किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

मलिका पुखराज

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

मलिका पुखराज

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

आबिदा परवीन

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

वली मोहम्मद वली

शग़्ल बेहतर है इश्क़-बाज़ी का

मेहरान अमरोही

सोहबत-ए-ग़ैर मूं जाया न करो

पीनाज़ मसानी

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

इक़बाल बानो

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

ऑडियो 8

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"गुजरात" के और शायर

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए