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वली मोहम्मद वली

1667 - 1707 | गुजरात, भारत

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

वली मोहम्मद वली

ग़ज़ल 40

शेर 25

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

उसे ज़िंदगी क्यूँ भारी लगे

चाहता है इस जहाँ में गर बहिश्त

जा तमाशा देख उस रुख़्सार का

दिल-ए-उश्शाक़ क्यूँ हो रौशन

जब ख़याल-ए-सनम चराग़ हुआ

याद करना हर घड़ी तुझ यार का

है वज़ीफ़ा मुझ दिल-ए-बीमार का

मुफ़लिसी सब बहार खोती है

मर्द का ए'तिबार खोती है

पुस्तकें 24

Aaina-e-Maana Numa

वली औरंगाबादी: बाज़ हकाइक़

2003

Deewan-e-Wali

 

1878

Deewan-e-Wali

Ma Deebacha

1921

Deewan-e-Wali

Ek Naayab Nuskha

 

Deewan-e-Wali

 

1873

Intikhab-e-Wali

 

1971

Intikhab-e-Wali

 

 

Intikhab-e-Wali

 

1991

Kulliyat-e-Wali

 

2008

Kulliyat-e-Wali

 

1927

वीडियो 6

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किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

मलिका पुखराज

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

मलिका पुखराज

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

आबिदा परवीन

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

वली मोहम्मद वली

शग़्ल बेहतर है इश्क़-बाज़ी का

मेहरान अमरोही

सोहबत-ए-ग़ैर मूं जाया न करो

पीनाज़ मसानी

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

इक़बाल बानो

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

ऑडियो 8

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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