आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "gulam"
नज़्म के संबंधित परिणाम "gulam"
नज़्म
पढ़ के जिस के हो गईं हुश्यार अक़वाम-ए-ग़ुलाम
इश्तिराकी फ़ल्सफ़ा का खुल गया हर दिल में बाब
वामिक़ जौनपुरी
नज़्म
इब्न-ए-मरयम भी उठे मूसी-ए-इमराँ भी उठे
राम ओ गौतम भी उठे फ़िरऔन ओ हामाँ भी उठे
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
बे-इल्म-ओ-बे-हुनर है जो दुनिया में कोई क़ौम
नेचर का इक़तिज़ा है रहे बन के वो ग़ुलाम
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
ये शब ओ रोज़, मह ओ साल गुज़र जाएँगे
हम से बे-मेहर ज़माने की नज़र के अतवार