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नज़्म
तिरे लुत्फ़-ओ-अता की धूम सही महफ़िल महफ़िल
इक शख़्स था इंशा नाम-ए-मोहब्बत में कामिल
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
महफ़िल-ए-शे'र-ओ-सुख़न दोस्तो बे-फ़ैज़ हुई
गुल करो शम'एँ चराग़ों की लवें ज़ख़्मी करो
जावेद अकरम फ़ारूक़ी
नज़्म
गंदुम-ए-ख़ल्वत-नशीं बाज़ार में लाया गया
और ज़ख़ीरा-बाज़ से चक्की में पिसवाया गया
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
वो राज़-दार-ए-महफ़िल-ए-याराँ नहीं रहा
वो ग़म-गुसार-ए-बज़्म-ए-अरीफ़ाँ चला गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
उठूँ उठ कर निज़ाम-ए-महफ़िल-ए-हस्ती बदल डालूँ
बढ़ूँ बढ़ कर बदी की क़ुव्वतों का सर कुचल डालूँ
क़ैसर अमरावतवी
नज़्म
रबाब-ए-इश्क़ हैं लर्ज़ां है इक तराना-ए-नाज़
जमी हुई है अभी महफ़िल-ए-शबाना-ए-नाज़
सय्यद आबिद अली आबिद
नज़्म
लाखों चीज़ें हैं हसीं महफ़िल-ए-दुनिया में मगर
ऐसी शय मिल नहीं सकती है कहीं से हम को
सलाम संदेलवी
नज़्म
अफ़्सुर्दा दाग़ से है तिरे महफ़िल-ए-अदब
ने वो सुरूर-ओ-सोज़ न जोश-ओ-ख़रोश है