सिगरेट शायरी

सुलगते सिगरेट और धड़कते दिल में कितनी मुमासिलत है!

बलराज मेनरा

سگریٹ اور چایے! میں ان دو بری عادتوں کا غلام ہوں۔

मुशर्रफ़ आलम ज़ौक़ी

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