पास था ज़र तो कोई ऐब न था
सब उयूब आए बे-ज़री के साथ
दौलत से कहाँ जुड़ते हैं टूटे हुए रिश्ते
शीशे को कभी गोंद से जोड़ा नहीं जाता
दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है
जब खुले नक़्द के औसाफ़ ब-फ़ैज़-ए-नक़्दी
कुछ रिसालों के एडीटर भी तरफ़-दार हुए
तेरी हस्ती का राज़ है पैसा
सामना नीस्ताँ से करता है
फ़िक्र माली की बढ़ने वाली है
पेड़ फलदार होने वाले हैं