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प्रेम और रोमांस पर कहानियाँ

आमिना

यह कहानी दौलत की हवस में रिश्तों की ना-क़द्री और इंसानियत से वंचित कुकर्म कर गुज़रने वाले व्यक्तियों के अंजाम को पेश करती है। दौलत की लालची सौतेली माँ के सताये हुए चंदू और बिंदू को जब क़िस्मत नवाज़ती है तो वो दोनों भी अपने मुश्किल दिन भूल कर रिश्तों की पवित्रता को मजरुह करने पर आमादा हो जाते हैं। चंदू अपने भाई बिंदू के बहकावे में आकर अपनी बीवी और बच्चे को सिर्फ़ दौलत की हवस में छोड़ देता है। जब दौलत ख़त्म हो जाती है और नशा उतरता है तो वह अपनी बीवी के पास वापस जाता है। उसका बेटा उसे उसी दरिया के पास ले जाता है जहाँ चंदू की सौतेली माँ ने डूबने के लिए उन दोनों भाइयों को छोड़ा था और बताता है कि यहाँ पर है मेरी माँ।

सआदत हसन मंटो
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बादशाहत का ख़ात्मा

"सौन्दर्य व आकर्षण के इच्छुक एक ऐसे बेरोज़गार नौजवान की कहानी है जिसकी ज़िंदगी का अधिकतर हिस्सा फ़ुटपाथ पर रात बसर करते हुए गुज़रा था। संयोगवश वो एक दोस्त के ऑफ़िस में कुछ दिनों के लिए ठहरता है जहां एक लड़की का फ़ोन आता है और उनकी बातचीत लगातार होने लगती है। मोहन को लड़की की आवाज़ से इश्क़ है इसलिए उसने कभी उसका नाम, पता या फ़ोन नंबर जानने की ज़हमत नहीं की। दफ़्तर छूट जाने की वजह से उसकी जो 'बादशाहत' ख़त्म होने वाली थी उसका विचार उसे सदमे में मुब्तला कर देता है और एक दिन जब शाम के वक़्त टेलीफ़ोन की घंटी बजती है तो उसके मुँह से ख़ून के बुलबुले फूट रहे होते हैं।"

सआदत हसन मंटो

असली जिन

लेस्बियन संबंधों पर आधारित कहानी। फर्ख़ंदा अपने माँ-बाप की इकलौती बेटी थी। बचपन में ही उसके बाप का देहांत हो गया था तो वह अकेले अपनी माँ के साथ रहने लगी थी। जवानी का सफ़र उसने तन्हा ही गुज़ार दिया। जब वह अट्ठारह साल की हुई तो उसकी मुलाक़ात नसीमा से हुई। नसीमा एक पंजाबी लड़की थी, जो हाल ही में पड़ोस में रहने आई थी। नसीमा एक लंबी-चौड़ी मर्दों के स्वभाव वाली महिला थी, जो फर्ख़ंदा को भा गई थी। जब फर्ख़ंदा की माँ ने उसका नसीमा से मिलना बंद कर दिया तो वह आधी पागल हो गई। लोगों ने कहा कि उस पर जिन्न है, पर छत पर जब एक दिन उसकी मुलाक़ात नसीमा के छोटे भाई से हुई तो उसके सभी जिन्न भाग गए।

सआदत हसन मंटो
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पतझड़ की आवाज़

यह कहानी की मरकज़ी किरदार तनवीर फ़ातिमा की ज़िंदगी के तजुर्बात और ज़ेहनियत की अक्कासी करती है। तनवीर एक अच्छे परिवार की सुशिक्षित लड़की है लेकिन ज़िंदगी जीने का फ़न उसे नहीं आता। उसकी ज़िंदगी में एक के बाद एक तीन मर्द आते हैं। पहला मर्द खु़श-वक़्त सिंह है जो ख़ुद से तनवीर फ़ातिमा की ज़िंदगी में दाख़िल होता है। दूसरा मर्द फ़ारूक़, पहले खु़श-वक़्त सिंह के दोस्त की हैसियत से उससे परिचित होता है और फिर वही उसका सब कुछ बन जाता है। इसी तरह तीसरा मर्द वक़ार हुसैन है जो फ़ारूक़ का दोस्त बनकर आता है और तनवीर फ़ातिमा को दाम्पत्य जीवन की ज़ंजीरों में जकड़ लेता है। तनवीर फ़ातिमा पूरी कहानी में सिर्फ़ एक बार ही अपने भविष्य के बारे में कोई फ़ैसला करती है, खु़श-वक़्त सिंह से शादी न करने का। और यही फ़ैसला उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होता है क्योंकि वह अपनी ज़िंदगी में आए उस पहले मर्द खु़श-वक़्त सिंह को कभी भूल नहीं पाती।

कुर्रतुलऐन हैदर
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ये ग़ाज़ी ये तेरे पुर-अस्रार बन्दे

यह कहानी पश्चिमी जर्मनी में जा रही एक ट्रेन से शुरू होती है। ट्रेन में पाँच लोग सफ़र कर रहे हैं। उनमें एक ब्रिटिश प्रोफे़सर है और उसके साथ उसकी बेटी है। साथ में एक कनाडाई लड़की और एक ईरानी प्रोफेसर हैं। शुरू में सब ख़ामोश बैठे रहते हैं। फिर धीरे-धीरे आपस में बातचीत करने लगता है। बातचीत के दौरान ही कनाडाई लड़की ईरानी प्रोफे़सर को पसंद करने लगती है। ट्रेन का सफ़र ख़त्म होने के बाद भी वे मिलते रहते हैं और अपने ख़ानदानी शजरों की उधेड़-बुन में लगे रहते हैं। उसी उधेड़-बुन में वे एक-दूसरे के क़रीब आते हैं और एक ऐसे रिश्ते में बंध जाते हैं जिसे कोई नाम नहीं दिया जाता। चारों तरफ जंग का माहौल है। ईरान में आंदोलन हो रहे हैं। इसी बीच एक दिन एयरपोर्ट पर धमाका होता है। उस बम-धमाके में ईरानी प्रोफे़सर और उसके साथी मारे जाते हैं। उस हादसे का कनाडाई लड़की पर जो असर पड़ता है वही इस कहानी का निष्कर्ष है।

कुर्रतुलऐन हैदर
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बिजली पहलवान

अमृतसर के अपने समय के एक नामी पहलवान की कहानी है। बिजली पहलवान की शोहरत सारे शहर में थी। हालाँकि देखने में वह मोटा और थुलथुल व्यक्ति था जो हर तरह के दो नंबरी काम किया करता था। फिर भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पाती थी। एक बार उसे सोलह-सत्रह साल की एक लड़की से मोहब्बत हो गई और उसने उससे शादी कर ली। शादी के छह महीने बीत जाने के बाद भी पहलवान ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। एक दिन जब वह अपनी पत्नी के लिए तोहफ़े लेकर घर पहुँचा तो उसकी नई-नवेली पत्नी उसके बड़े बेटे के साथ एक कमरे में बंद खिलखिला रही थी। इससे क्रोधित हो कर बिजली पहलवान ने उसे हमेशा के लिए अपने बेटे के हवाले कर दिया।

सआदत हसन मंटो