ADVERTISEMENT

फ़िल्मी शेर पर ग़ज़लें

यहाँ हमने जो अशआर जमा

किए है उन का इस्तेमाल फ़िल्मों में हुआ है और इसी वजह से इन में से बेश्तर अशआर ज़बान-ए-ज़द ख़ास-ओ-आम है और हमारी ज़िंदगी के रोज़-मर्रा के मुआमलात को घेरते हैं। उम्मीद है आप को ये इन्तिख़ाब पसंद आएगा।

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

आप की याद आती रही रात भर

मख़दूम मुहिउद्दीन
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जाएगा

इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी