Bashir Badr's Photo'

बशीर बद्र

1935 | भोपाल, भारत

ग़ज़ल 89

शेर 161

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं

पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा हों

bear enmity with all your might, but this we should decide

if ever we be friends again, we are not mortified

bear enmity with all your might, but this we should decide

if ever we be friends again, we are not mortified

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लतीफ़े 5

 

ई-पुस्तक 14

Aas

 

1993

Aas

 

1993

आज़ादी के बाद की ग़ज़ल का तन्क़ीदी मुताला

 

1981

बशीर बद्र की ग़ज़लें

 

2001

Basheer Badr: Fan-o-Shakhsiyat

 

1988

डॉ. बशीर बद्र की शायरी

 

2005

Ghazal Ka Aham Mod: Basheer Badr

 

2010

Ghazal Universe

 

2003

इकाई

 

1969

इकाई

 

1969

चित्र शायरी 20

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत

उस की आँखों को ग़ौर से देखो मंदिरों में चराग़ जलते हैं

न तुम होश में हो न हम होश में हैं चलो मय-कदे में वहीं बात होगी

हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत

वीडियो 59

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Bashir Badr at International Mushaira 2002, Houston

Dr. Basheer Badr reciting at International Mushaira 2002 organised by Aligarh Alumni Association Houston USA ज़फ़र इक़बाल

Bashir Badr reciting at Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira 2003, organized by Aligarh Alumni Association Houston, USA.

ज़फ़र इक़बाल

Yeh Chirag Be Nazar Hai

भारती विश्वनाथन

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

ज़फ़र इक़बाल

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

फ़हद

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

हरिहरण

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

हरिहरण

अब किसे चाहें किसे ढूँडा करें

शकीला ख़ुरासानी

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

प्रित डिलन

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

Urdu Studio

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

जगजीत सिंह

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी

अज्ञात

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

तलअत अज़ीज़

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

सायमा

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए

जगजीत सिंह

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे

चित्रा सिंह

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

चंदन दास

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

हरिहरण

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे

चंदन दास

न जी भर के देखा न कुछ बात की

अज्ञात

न जी भर के देखा न कुछ बात की

नूर जहाँ

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

जगजीत सिंह

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

राज कुमार रिज़वी

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा

तलअत अज़ीज़

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा

चंदन दास

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो

जगजीत सिंह

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे

राजिंदर मेहता

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

जगजीत सिंह

मिरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

Urdu Studio

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

जगजीत सिंह

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है

चंदन दास

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

विविध

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

Urdu Studio

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना

तलअत अज़ीज़

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना

तलअत अज़ीज़

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

ज़फ़र इक़बाल

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

गुलबहार बानो

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

चंदन दास

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

तलअत अज़ीज़

सब का चेहरा तेरे जैसे क्यूँ है

तपसी नागराज

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

जगजीत सिंह

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं

तलअत अज़ीज़

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं

चित्रा सिंह

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

सायमा

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

भारती विश्वनाथन

ऑडियो 18

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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