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नज़ीर अकबराबादी

1735 - 1830 | आगरा, भारत

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

नज़ीर अकबराबादी

ग़ज़ल 230

शेर 105

जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब हो

ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब हो

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था इरादा तिरी फ़रियाद करें हाकिम से

वो भी एे शोख़ तिरा चाहने वाला निकला

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मय पी के जो गिरता है तो लेते हैं उसे थाम

नज़रों से गिरा जो उसे फिर किस ने सँभाला

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थे हम तो ख़ुद-पसंद बहुत लेकिन इश्क़ में

अब है वही पसंद जो हो यार को पसंद

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क्यूँ नहीं लेता हमारी तू ख़बर बे-ख़बर

क्या तिरे आशिक़ हुए थे दर्द-ओ-ग़म खाने को हम

रुबाई 22

पुस्तकें 44

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1959

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Deewan-e-Nazeer Akbarabadi

 

1942

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1991

Intikhab-e-Ghazliyat-e-Nazeer Akbarabadi

 

1994

Intikhab-e-Manzumat-e-Nazeer Akbarabadi

 

1988

इंतिख़ाब-ए-नज़ीर

 

2003

इंतिख़ाब-ए-नज़ीर अकबराबादी

 

1985

Intikhab-e-Nazeer Akbarabadi

 

2001

चित्र शायरी 2

था इरादा तिरी फ़रियाद करें हाकिम से वो भी एे शोख़ तिरा चाहने वाला निकला

 

वीडियो 22

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नज़र पड़ा इक बुत-ए-परी-वश निराली सज-धज नई अदा का

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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