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परवीन शाकिर

1952 - 1994 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान की सबसे लोकप्रिय शायरात में शामिल। स्त्रियों की भावनओं को आवाज़ देने के लिए मशहूर

ग़ज़ल 80

नज़्म 33

शेर 110

रस्ते में मिल गया तो शरीक-ए-सफ़र जान

जो छाँव मेहरबाँ हो उसे अपना घर जान

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मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गईं

शेर कहती हुई आँखें उस की

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लड़कियों के दुख अजब होते हैं सुख उस से अजीब

हँस रही हैं और काजल भीगता है साथ साथ

ई-पुस्तक 15

इंकार

 

 

Inkar

 

1990

Inkar

 

1997

Khud Kalami

 

 

Khushbu

 

1980

ख़ुशबू

 

1988

Mah-e-Tamam

 

1995

Mah-e-Tamam

Kulliyat

1997

माह-ए-तमाम

 

2008

Mah-e-Tamam Kulliyat

 

1997

चित्र शायरी 17

वीडियो 46

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सेक्शन से वीडियो
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Ab itni saadgi laayen kahaan se

परवीन शाकिर

Baab-e-hairat se mujhe izn-e-safar hone ko hai

परवीन शाकिर

Sanaey Anjum o Tasbeehe

परवीन शाकिर

Taza mohabbaton ka maza

परवीन शाकिर

अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से

परवीन शाकिर

अब भला छोड़ के घर क्या करते

परवीन शाकिर

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी

परवीन शाकिर

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की

परवीन शाकिर

ख़याल-ओ-ख़्वाब हुआ बर्ग-ओ-बार का मौसम

परवीन शाकिर

चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया

परवीन शाकिर

ताज़ा मोहब्बतों का नशा जिस्म-ओ-जाँ में है

परवीन शाकिर

बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़्लाक से है

परवीन शाकिर

बाब-ए-हैरत से मुझे इज़्न-ए-सफ़र होने को है

परवीन शाकिर

हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया

परवीन शाकिर

हर्फ़-ए-ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है

परवीन शाकिर

सेक्शन से वीडियो
अन्य वीडियो
Ek Khat- Parveen Shakir ke naam - by Zia Mohiuddin

ज़िया मोहीउद्दीन

Mushkil hai ke ab shahar mein nikle koi ghar se

राधिका चोपड़ा

ग़ुलाम अली

बिल्क़ीस ख़ानम

अक्स-ए-ख़ुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई

साधना सरगम

अपनी तन्हाई मिरे नाम पे आबाद करे

अज्ञात

अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ

अज्ञात

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी अज्ञात

इतना मालूम है!

अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ अज्ञात

इसी में ख़ुश हूँ मिरा दुख कोई तो सहता है

अज्ञात

कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए

टीना सानी

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की

मेहदी हसन

कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी

अज्ञात

क़र्या-ए-जाँ में कोई फूल खिलाने आए

टीना सानी

खुलेगी उस नज़र पे चश्म-ए-तर आहिस्ता आहिस्ता

अज्ञात

खुली आँखों में सपना झाँकता है

अज्ञात

गवाही कैसे टूटती मुआ'मला ख़ुदा का था

टीना सानी

टूटी है मेरी नींद मगर तुम को इस से क्या

Tassawar Khanum

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है

अज्ञात

पूरा दुख और आधा चाँद

अज्ञात

बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना

ताहिरा सैयद

बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गए

बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा

अज्ञात

मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से

राधिका चोपड़ा

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा

ग़ुलाम अली

शब वही लेकिन सितारा और है

रुना लैला

सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ

टीना सानी

सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ

पंकज उदास

सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ

ताहिरा सैयद

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की

राज कुमार रिज़वी

ऑडियो 4

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी

पा-ब-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन

बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़्लाक से है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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