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आलम निज़ामी

1984 | मुंबई, भारत

मुशाइरों के मशहूर शाइर

मुशाइरों के मशहूर शाइर

आलम निज़ामी

वीडियो 14

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

आलम निज़ामी

आलम निज़ामी

कभी इल्म ने उसे मात दी कभी आगही ने हरा दिया

आलम निज़ामी

क्यों हो मुझ से ख़फ़ा कहो तो सही

आलम निज़ामी

ख़ाना-ए-दिल को सजाओगे तो याद आउँगा

आलम निज़ामी

घर में आराम का साया नहीं रहने देती

आलम निज़ामी

जाने क्यों मोहब्बत में दिलकशी नहीं मिलती

आलम निज़ामी

जिस तरह बच्चे बुज़ुर्गों के चरण चूमते हैं

आलम निज़ामी

धूप में क़तरा-ए-शबनम को तरस जाओगे

आलम निज़ामी

फ़र्श-ए-मख़मल पे कभी नींद न आई मुझ को

आलम निज़ामी

मैं समझ रहा था कि वक़्त ने तिरा नाम दिल से मिटा दिया

आलम निज़ामी

ये अलग बात कि ज़िंदा हूँ ज़माने के लिए

आलम निज़ामी

ये अलग बात कि फ़ुर्सत भी नहीं मिलती है

आलम निज़ामी

राख माज़ी की कुरेदोगे तो क्या पाओगे

आलम निज़ामी

वो तसव्वुर में तो आता है चला जाता है

आलम निज़ामी

वो तोहमतें न लगाता तो और क्या करता

आलम निज़ामी

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