Abdul Ahad Saaz's Photo'

अब्दुल अहद साज़

1950 | मुंबई, भारत

मुम्बई के प्रख्यात आधुनिक शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में लोकप्रिय।

मुम्बई के प्रख्यात आधुनिक शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में लोकप्रिय।

ग़ज़ल 55

नज़्म 27

शेर 43

बचपन में हम ही थे या था और कोई

वहशत सी होने लगती है यादों से

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दोस्त अहबाब से लेने सहारे जाना

दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना

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नींद मिट्टी की महक सब्ज़े की ठंडक

मुझ को अपना घर बहुत याद रहा है

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ई-पुस्तक 1

सरगोशियाँ ज़मानों की

 

2003

 

वीडियो 15

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Abdul Ahad Saaz at a mushaira in Mumbai

अब्दुल अहद साज़

Abdul Ahad Saaz reciting his Ghazal/Nazm at Mushaira (Shaam-e-Sher) by Rekhta.org-2014

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Bohat malool bade shaadma gaye huye hain

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Door se shehr-e-fikr suhana lagta hai_Ghazal by Abdul Ahad Saaz

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Jaane qalam ki aankh kiska zahoor tha

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Lafzon ke sehra mein kya maani ke serab dikhana bhi

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Meri nigahon pe jisne sham-o-shehar ki rahnaiyan likhi hain_Ghazal by Abdul Ahad Saaz

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

Qeemat e Wajood_Nazm by Abdul Ahad Saaz

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

bahut maluul ba.De shaadmaa.n ga.e hu.e hai.n

अब्दुल अहद साज़

jaane qalam kii aa.nkh me.n kis kaa zuhuur thaa

अब्दुल अहद साज़

lafzo.n ke sahraa me.n kyaa ma.anii ke saraab dikhaanaa bhii

अब्दुल अहद साज़

Sabaq umr ka ya zamane ka hai

Prominent poet from Mumbai, well-known to connoisseurs of serious poetry. अब्दुल अहद साज़

दरख़्त रूह के झूमे परिंद गाने लगे

अब्दुल अहद साज़

ऑडियो 16

जाने क़लम की आँख में किस का ज़ुहूर था

दरख़्त रूह के झूमे परिंद गाने लगे

बहुत मलूल बड़े शादमाँ गए हुए हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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