Abdul Salam's Photo'

अब्दुल सलाम

1953 | भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 4

जो ये हिन्दोस्ताँ नहीं होता

तो ये उर्दू ज़बाँ नहीं होती

ईद का दिन है गले मिल लीजे

इख़्तिलाफ़ात हटा कर रखिए

शेर कहने की तबीअत रही

जिस से आमद थी वो सूरत रही

ई-पुस्तक 1

Shumara Number-056,057

1975