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अब्दुल सलाम

1953 | भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 4

जो ये हिन्दोस्ताँ नहीं होता

तो ये उर्दू ज़बाँ नहीं होती

ईद का दिन है गले मिल लीजे

इख़्तिलाफ़ात हटा कर रखिए

शेर कहने की तबीअत रही

जिस से आमद थी वो सूरत रही

पुस्तकें 2

अस्मत चुग़ताई और नफ़्सियाती नॉवेल

 

1989

क़ुर्रतुल ऐन हैदर और नॉवेल का जदीद फ़न

 

1983