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अब्दुर्रहमान मोमिन

1996 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान के नौजवान शायर

पाकिस्तान के नौजवान शायर

ग़ज़ल 18

शेर 21

चाँद में तू नज़र आया था मुझे

मैं ने महताब नहीं देखा था

ख़ुद को कितना भुला दिया मैं ने

तू भी अब अजनबी सा लगता है

सितम तो ये है कि मैं ने उसे भी छोड़ दिया

जो सब को छोड़ के तन्हा खड़ा है मेरे साथ

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