अभिषेक शुक्ला
ग़ज़ल 24
अशआर 23
मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
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मैं यूँ ही नहीं अपनी हिफ़ाज़त में लगा हूँ
मुझ में कहीं लगता है कि रक्खा हुआ तू है
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तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है
आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
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मैं ने जब ख़ुद की तरफ़ ग़ौर से देखा तो खुला
मुझ को इक मेरे सिवा कोई परेशानी नहीं
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कभी कभी तो ये वहशत भी हम पे गुज़री है
कि दिल के साथ ही देखा है डूबना शब का
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वीडियो 9
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अभिषेक शुक्ला
अभिषेक शुक्ला
वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

Abhishek Shukla, a young poet from Lucknow at a mushaira in Delhi organized by http://rekhta.org/ अभिषेक शुक्ला

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