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प्रगतिशील विचारों के पाकिस्तानी शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में विख्यात।

प्रगतिशील विचारों के पाकिस्तानी शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में विख्यात।

ग़ज़ल 23

शेर 20

हर एक आँख में होती है मुंतज़िर कोई आँख

हर एक दिल में कहीं कुछ जगह निकलती है

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याद भी तेरी मिट गई दिल से

और क्या रह गया है होने को

कहीं कोई चराग़ जलता है

कुछ कुछ रौशनी रहेगी अभी

भर लाए हैं हम आँख में रखने को मुक़ाबिल

इक ख़्वाब-ए-तमन्ना तिरी ग़फ़लत के बराबर

मैं ठहरता गया रफ़्ता रफ़्ता

और ये दिल अपनी रवानी में रहा

पुस्तकें 2

आख़िरी दिन से पहले

 

1997

ग़फ़लत के बराबर

 

2007

 

ऑडियो 7

कोई सोचे न हमें कोई पुकारा न करे

गुरेज़ाँ था मगर ऐसा नहीं था

तुझ से वाबस्तगी रहेगी अभी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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