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अदा जाफ़री

1924 - 2015 | कराची, पाकिस्तान

महत्वपूर्ण पाकिस्तानी शायरा, अपनी नर्म और सुगढ़ शायरी के लिए विख्यात।

महत्वपूर्ण पाकिस्तानी शायरा, अपनी नर्म और सुगढ़ शायरी के लिए विख्यात।

अदा जाफ़री

ग़ज़ल 43

शेर 40

मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ

तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या

हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी

फूल बालों में इक सजाने को

हमारे शहर के लोगों का अब अहवाल इतना है

कभी अख़बार पढ़ लेना कभी अख़बार हो जाना

होंटों पे कभी उन के मिरा नाम ही आए

आए तो सही बर-सर-ए-इल्ज़ाम ही आए

अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो

हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना

पुस्तकें 14

Ada Jafri

Fan-o-Shakhsiyat

1998

ग़ज़ल नुमा

 

2012

ग़ज़ल नुमा

 

1988

Ghazalan Tum To Waqif Ho

 

1982

हर्फ़-ए-शनासाई

 

1999

Jo Rahi So Bekhabari Rahi

Khud Navisht

2011

Jo Rahi So Bekhabari Rahi

Khud Navisht

1996

मैं साज़ ढूंढती रही

 

1982

साज़-ए-सुख़न बहाना है

 

1982

Saz-e-Sukhan

 

1988

चित्र शायरी 6

वैसे ही ख़याल आ गया है या दिल में मलाल आ गया है आँसू जो रुका वो किश्त-ए-जाँ में बारिश की मिसाल आ गया है ग़म को न ज़ियाँ कहो कि दिल में इक साहिब-ए-हाल आ गया है जुगनू ही सही फ़सील-ए-शब में आईना-ख़िसाल आ गया है आ देख कि मेरे आँसुओं में ये किस का जमाल आ गया है मुद्दत हुई कुछ न देखने का आँखों को कमाल आ गया है मैं कितने हिसार तोड़ आई जीना था मुहाल आ गया है

 

वीडियो 17

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
तौफ़ीक़ से कब कोई सरोकार चले है

अदा जाफ़री

शिकस्त-ए-साज़

मैं ने गुल-रेज़ बहारों की तमन्ना की थी अदा जाफ़री

ऑडियो 12

आलम ही और था जो शनासाइयों में था

एक आईना रू-ब-रू है अभी

ढलके ढलके आँसू ढलके

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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