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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Ahmad Faraz's Photo'

बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और एंटी-स्टैब्लिशमेंट शायरी के लिए प्रसिद्ध

बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और एंटी-स्टैब्लिशमेंट शायरी के लिए प्रसिद्ध

अहमद फ़राज़

ग़ज़ल 149

नज़्म 39

अशआर 183

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए

फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल

कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

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तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़'

दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम

कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी

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नअत 1

 

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हास्य वीडियो
बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते

अहमद फ़राज़

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

अहमद फ़राज़

ऑडियो 105

अजब जुनून-ए-मसाफ़त में घर से निकला था

अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

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