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अहमद फ़राज़

1931 - 2008 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और विरोधी -कविता के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 134

नज़्म 34

शेर 166

हवा में नश्शा ही नश्शा फ़ज़ा में रंग ही रंग

ये किस ने पैरहन अपना उछाल रक्खा है

क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से

वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला

यूँही मौसम की अदा देख के याद आया है

किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ

ई-पुस्तक 27

Be Awaz Gali Kuchon Mein

 

2002

Be Awaz Kuchon Mein

 

1984

Dard-e-Aashob

 

2002

दर्द-ए-आशोब

 

Dard-e-Aashob

 

Dard-e-Ashob

 

Ghazal Baha Na Karun

 

2002

जानाँ ! जानाँ

 

1979

Janaan Janaan

 

Janan Janan

 

चित्र शायरी 50

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Ahmad Farz reciting at a mushaira

अहमद फ़राज़

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
1986 Mushaira

अहमद फ़राज़

Ahmad Faraz in a Mushaira

अहमद फ़राज़

Ahmad Faraz reciting his poetry in OSLO, 2006.

अहमद फ़राज़

Ahmed Faraz - Zindagi youn thi kay jeenay ka bahana tu tha - UrduWorld.Com

अहमद फ़राज़

At a mushaira

अहमद फ़राज़

Lucknow Sanskrutic Mahotsav Mushaira

अहमद फ़राज़

Main ek do roz ka mehmaan tere shahr mein

अहमद फ़राज़

Mujhe Tere Dard ke Alava Bhi- Very Nice Nazm Written & Recited By Ahmed Faraz

अहमद फ़राज़

Mushaira Jashn e Faiz 1986

अहमद फ़राज़

Reciting own poetry

अहमद फ़राज़

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है

अहमद फ़राज़

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

अहमद फ़राज़

इक बूँद थी लहू की सर-ए-दार तो गिरी

अहमद फ़राज़

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ

अहमद फ़राज़

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया

अहमद फ़राज़

ऐ मेरे सारे लोगो

अब मिरे दूसरे बाज़ू पे वो शमशीर है जो अहमद फ़राज़

क़ुर्ब-ए-जानाँ का न मय-ख़ाने का मौसम आया

अहमद फ़राज़

काली दीवार

कल वॉशिंगटन शहर की हम ने सैर बहुत की यार अहमद फ़राज़

ख़ामोश हो क्यूँ दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते

अहमद फ़राज़

चाक-पैराहनी-ए-गुल को सबा जानती है

अहमद फ़राज़

जान से इश्क़ और जहाँ से गुरेज़

अहमद फ़राज़

तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए

अहमद फ़राज़

दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें

अहमद फ़राज़

दोस्ती का हाथ

गुज़र गए कई मौसम कई रुतें बदलीं अहमद फ़राज़

मैं तो मक़्तल में भी क़िस्मत का सिकंदर निकला

अहमद फ़राज़

मुंतज़िर कब से तहय्युर है तिरी तक़रीर का

अहमद फ़राज़

मुहासरा

मिरे ग़नीम ने मुझ को पयाम भेजा है अहमद फ़राज़

मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलेख़ा तपाक चाहता है

अहमद फ़राज़

ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी

अहमद फ़राज़

ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में

ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में अहमद फ़राज़

वापसी

उस ने कहा अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अहमद फ़राज़

सामने उस के कभी उस की सताइश नहीं की

अहमद फ़राज़

हम तो यूँ ख़ुश थे कि इक तार गरेबान में है

अहमद फ़राज़

हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रक्खे

अहमद फ़राज़

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2009 Ahmed Faraz interview Dr. Shahid Maqsood ARY Digital

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अहमद फ़राज़

Interview with Ahmad Faraz

Obaid Siddiqui interviewing Ahmad Faraz. अहमद फ़राज़

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"Anam" a Nazm By Faraz Ahmad sung By: Sunil Chaudhry

अज्ञात

Aaj phir dil ne kaha aao bhuladen yaaden

अज्ञात

Ahmad Faraz Ghazals

In Solidarity with Gaza - Ahmed Faraz Nazm

अज्ञात

Ye to uska hi karishma hai

अज्ञात

Zindagi yun thi ke jeena ka bahaana tu tha

Salma Agha

पंकज उदास

jab bhi dil khol ke roye honge

हामिद अली ख़ान

Ranjish hi sahi dil hi

शाहिदा मिनी

अजब जुनून-ए-मसाफ़त में घर से निकला था

मेहदी हसन

अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम

ग़ुलाम अली

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

अज्ञात

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

मेहनाज़ बेगम

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

अज्ञात

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

फैसल लतीफ

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

मेहदी हसन

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

इक़बाल बानो

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

मंजरी

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

सज्जाद अली

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

अज्ञात

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

अज्ञात

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

रूप कुमार राठौड़

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

जगजीत सिंह

अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं

रिज़वान आज़म

अव्वल अव्वल की दोस्ती है अभी

विविध

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

नुसरत फ़तह अली ख़ान

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

अज्ञात

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

नूर जहाँ

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

जगजीत सिंह

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा

लता मंगेशकर

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ

भारती विश्वनाथन

उस का अपना ही करिश्मा है फ़ुसूँ है यूँ है

अज्ञात

उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ

भारती विश्वनाथन

ऐसे चुप हैं कि ये मंज़िल भी कड़ी हो जैसे

ग़ुलाम अली

कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो

पंकज उदास

क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे

रुना लैला

करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे

ग़ुलाम अली

क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे

गुलशन आरा सैयद

जुज़ तिरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे

ग़ुलाम अली

जब भी दिल खोल के रोए होंगे

हुसैन बख्श

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

ग़ुलाम अली

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

मसूद मलिक

जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो

नुसरत फ़तह अली ख़ान

जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो

अज्ञात

जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो

तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तिरी दुहाई न दूँ

हरिहरण

तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ

शकीला ख़ुरासानी

तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़

हामिद अली ख़ान

तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़

अमानत अली ख़ान

तेरी बातें ही सुनाने आए

नूर जहाँ

तेरी बातें ही सुनाने आए

जगजीत सिंह

तेरी बातें ही सुनाने आए

ग़ुलाम अली

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

जगजीत सिंह

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

ग़ुलाम अली

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

मक़बूल अहमद साबरी

न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतिज़ार कोई तो हो

इक़बाल बानो

पयाम आए हैं उस यार-ए-बेवफ़ा के मुझे

नूर जहाँ

पयाम आए हैं उस यार-ए-बेवफ़ा के मुझे

Humaira Channa

फिर उसी रहगुज़ार पर शायद

जगजीत सिंह

फिर उसी रहगुज़ार पर शायद

जगजीत सिंह

ये आलम शौक़ का देखा न जाए

ताहिरा सैयद

ये आलम शौक़ का देखा न जाए

नाहीद अख़्तर

ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी

सलमान अल्वी

यूँ तो पहले भी हुए उस से कई बार जुदा

नुसरत फ़तह अली ख़ान

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

रफ़ाक़त अली ख़ान

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

मेहदी हसन

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

हबीब वली मोहम्मद

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

अज्ञात

रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं

अज्ञात

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें

अज्ञात

शो'ला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो

मेहदी हसन

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

सलामत अली

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

विविध

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

अज्ञात

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

सलमान अल्वी

साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले

अताउल्लाह खां

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते

ग़ुलाम अली

सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते

नूर जहाँ

हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू

ग़ुलाम अली

हम भी शाएर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं

अज्ञात

तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ

लता टंडन

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

आशा भोसले

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

रुना लैला

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

इक़बाल बानो

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

अनुराधा पौडवाल

ऑडियो 64

अजब जुनून-ए-मसाफ़त में घर से निकला था

अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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