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अहमद मुनीब

ग़ज़ल 10

अशआर 6

बात कुछ यूँ है कि कल रात भरी महफ़िल में

उस का जब ज़िक्र हुआ बात बदल दी मैं ने

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बात कुछ यूँ है कि कल रात भरी महफ़िल में

उस का जब ज़िक्र हुआ बात बदल दी मैं ने

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सूरज सितारे चाँद फ़लक कहकशाँ ज़मीं

बस इक नज़र में देख लिए आसमाँ ज़मीं

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सूरज सितारे चाँद फ़लक कहकशाँ ज़मीं

बस इक नज़र में देख लिए आसमाँ ज़मीं

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उदासी मुस्कुराती है मियाँ तब शेर होते हैं

नमी आँखों में आती है मियाँ तब शे'र होते हैं

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