ग़ज़ल 7

शेर 7

एक मुद्दत से उसे देख रहा हूँ 'अहमद'

और लगता है अभी एक झलक देखा है

क्या बात करूँ जो बातें तुम से करनी थीं

अब उन बातों का वक़्त नहीं क्या बात करूँ

अजनबी लोग हैं मैं जिन में घिरा रहता हूँ

आश्ना कोई यहाँ मेरे फ़साने का नहीं

पुस्तकें 2

Tulu-e-Shaam

Part-001

2013

तुलू-ए-शाम

भाग-002

2013

 

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