ग़ज़ल 4

 

नज़्म 2

 

शेर 18

वो करे बात तो हर लफ़्ज़ से ख़ुश्बू आए

ऐसी बोली वही बोले जिसे उर्दू आए

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लोग हैरत से मुझे देख रहे हैं ऐसे

मेरे चेहरे पे कोई नाम लिखा हो जैसे

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जो चेहरे दूर से लगते हैं आदमी जैसे

वही क़रीब से पत्थर दिखाई देते हैं

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पुस्तकें 4

Ahmad Wasi : Shairi Aur Shakhsiyat

 

2010

Baheta Pani

 

1983

Jugnu Mere Sath Sath

 

2004

Tahreeren

 

2015

 

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