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ऐन ताबिश

1958 | पटना, भारत

प्रसिद्ध समकालीन शायर, अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

प्रसिद्ध समकालीन शायर, अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Kahaniya tamam shab tamam shab kahaniya

Eminent poet, writer Ain Tabish who is a professor by profession is at Rekhta studio. Ain Tabish is different from other poets of his generation. He started writing when modern poetry was at its peak yet he is more inclined to traditional and classical poetry which exhibit from his works. ऐन ताबिश

आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का

ऐन ताबिश

आँसुओं के रतजगों से

सारे मंज़र एक जैसे ऐन ताबिश

इक शहर था इक बाग़ था

इक शहर था इक बाग़ था ऐन ताबिश

ख़ाकसारी थी कि बिन देखे ही हम ख़ाक हुए

ऐन ताबिश

ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

ऐन ताबिश

घनी सियह ज़ुल्फ़ बदलियों सी बिला सबब मुझ में जागती है

ऐन ताबिश

बदलने का कोई मौसम नहीं होता

चले थे लोग जब घर से ऐन ताबिश

मेरी तन्हाई के एजाज़ में शामिल है वही

ऐन ताबिश

यहाँ के रंग बड़े दिल-पज़ीर हुए हैं

ऐन ताबिश

वही जुनूँ की सोख़्ता-जानी वही फ़ुसूँ अफ़्सानों का

ऐन ताबिश

हयात-ए-सोख़्ता-सामाँ इक इस्तिअा'रा-ए-शाम

ऐन ताबिश

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ऐन ताबिश

Ain Tabish is a Poet and Professor from Patna. Watch him talking about his journey as a Poet with Mr. Farhat Ehsas. ऐन ताबिश

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • Kahaniya tamam shab tamam shab kahaniya

    Kahaniya tamam shab tamam shab kahaniya ऐन ताबिश

  • आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का

    आवारा भटकता रहा पैग़ाम किसी का ऐन ताबिश

  • आँसुओं के रतजगों से

    आँसुओं के रतजगों से ऐन ताबिश

  • इक शहर था इक बाग़ था

    इक शहर था इक बाग़ था ऐन ताबिश

  • ख़ाकसारी थी कि बिन देखे ही हम ख़ाक हुए

    ख़ाकसारी थी कि बिन देखे ही हम ख़ाक हुए ऐन ताबिश

  • ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ

    ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ ऐन ताबिश

  • घनी सियह ज़ुल्फ़ बदलियों सी बिला सबब मुझ में जागती है

    घनी सियह ज़ुल्फ़ बदलियों सी बिला सबब मुझ में जागती है ऐन ताबिश

  • बदलने का कोई मौसम नहीं होता

    बदलने का कोई मौसम नहीं होता ऐन ताबिश

  • मेरी तन्हाई के एजाज़ में शामिल है वही

    मेरी तन्हाई के एजाज़ में शामिल है वही ऐन ताबिश

  • यहाँ के रंग बड़े दिल-पज़ीर हुए हैं

    यहाँ के रंग बड़े दिल-पज़ीर हुए हैं ऐन ताबिश

  • वही जुनूँ की सोख़्ता-जानी वही फ़ुसूँ अफ़्सानों का

    वही जुनूँ की सोख़्ता-जानी वही फ़ुसूँ अफ़्सानों का ऐन ताबिश

  • हयात-ए-सोख़्ता-सामाँ इक इस्तिअा'रा-ए-शाम

    हयात-ए-सोख़्ता-सामाँ इक इस्तिअा'रा-ए-शाम ऐन ताबिश

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