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अकबर इलाहाबादी

1846 - 1921 | इलाहाबाद, भारत

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

अकबर इलाहाबादी

ग़ज़ल 72

नज़्म 8

अशआर 136

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

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दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

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हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना

हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना

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जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर

हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है

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हास्य 3

 

क़ितआ 32

रुबाई 53

क़िस्सा 8

पुस्तकें 60

चित्र शायरी 15

वीडियो 10

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नय्यरा नूर

आम-नामा

नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए Urdu Studio

आह जो दिल से निकाली जाएगी

अज्ञात

ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता

अज्ञात

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

अकबर इलाहाबादी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

कुंदन लाल सहगल

दिल मिरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला

अज्ञात

बर्क़-ए-कलीसा

अज्ञात

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

मंजरी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

रंजीत रजवाड़ा

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अकबर इलाहाबादी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अमानत अली ख़ान

ऑडियो 21

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते

ख़त्म किया सबा ने रक़्स गुल पे निसार हो चुकी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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