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अकबर इलाहाबादी

1846 - 1921 | इलाहाबाद, भारत

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

ग़ज़ल 70

नज़्म 5

 

शेर 121

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

I do suffer slander, when I merely sigh

she gets away with murder, no mention of it nigh

I do suffer slander, when I merely sigh

she gets away with murder, no mention of it nigh

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

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आई होगी किसी को हिज्र में मौत

मुझ को तो नींद भी नहीं आती

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रुबाई 51

क़ितआ 5

 

हास्य 3

 

लतीफ़े 8

ई-पुस्तक 58

अकबर इलाहाबादी

तहक़ीक़ी-ओ-तन्क़ीदी मुताला

2003

Akbar Allahabadi

 

1931

Akbar Allahabadi

Ek Samaji wa Siyasi Mutala

1977

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

अकबर इलाहाबादी के लतीफ़े

 

1954

Akbar Allahabadi: Ek Samaji Wa Siyasi Mutala

 

2011

Akbar Is Daur Mein

 

1952

अकबर नामा या अकबर मेरी नज़र में

 

1954

अशआर-ए-अकबर

 

 

चित्र शायरी 12

कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी खुलता नहीं हाल उन की तबीअत का ज़रा भी

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

हर एक से सुना नया फ़साना हम ने देखा दुनिया में एक ज़माना हम ने अव्वल ये था कि वाक़फ़ियत पे था नाज़ आख़िर ये खुला कि कुछ न जाना हम ने

रहमान के फ़रिश्ते गो हैं बहुत मुक़द्दस शैतान ही की जानिब लेकिन मेजोरिटी है

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

वीडियो 12

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ऑडियो 21

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ख़त्म किया सबा ने रक़्स गुल पे निसार हो चुकी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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