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अकबर इलाहाबादी

1846 - 1921 | इलाहाबाद, भारत

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

ग़ज़ल 70

नज़्म 6

शेर 127

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

I do suffer slander, when I merely sigh

she gets away with murder, no mention of it nigh

I do suffer slander, when I merely sigh

she gets away with murder, no mention of it nigh

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

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हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना

हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना

how easy is for these maidens to make the lightening fall

how easy is for these maidens to make the lightening fall

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हास्य 2

 

रुबाई 54

क़ितआ 17

मुखम्मस 1

 

ई-पुस्तक 97

Akbar Alahabadi

Ek Samaji-o-iyasi Mutala

2011

Akbar Allahabadi

 

1931

अकबर इलाहाबादी

तहक़ीक़ी-ओ-तन्क़ीदी मुताला

2003

Akbar Allahabadi

 

1983

Akbar Allahabadi

Ek Samaji wa Siyasi Mutala

1977

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

Akbar Allahabadi Aur Unka Kalam

 

1964

Akbar Allahabadi Ke Lateefe

 

1954

Akbar Allahabadi: Ek Samaji Wa Siyasi Mutala

 

2011

Akbar Is Daur Mein

 

1952

चित्र शायरी 13

कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी खुलता नहीं हाल उन की तबीअत का ज़रा भी

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी

हर एक से सुना नया फ़साना हम ने देखा दुनिया में एक ज़माना हम ने अव्वल ये था कि वाक़फ़ियत पे था नाज़ आख़िर ये खुला कि कुछ न जाना हम ने

आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझ को तो नींद भी नहीं आती

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

हुए इस क़दर मोहज़्ज़ब कभी घर का मुँह न देखा कटी उम्र होटलों में मरे अस्पताल जा कर

वीडियो 12

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kahen kisse kissa e dard o gham

नय्यरा नूर

आम-नामा

नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए Urdu Studio

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हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

मंजरी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

रंजीत रजवाड़ा

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अमानत अली ख़ान

ऑडियो 21

आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते

ख़त्म किया सबा ने रक़्स गुल पे निसार हो चुकी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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