अकबर लाहौरी के शेर
कफ़न की क़ीमत सुनेंगे मुर्दे तो इस के सदमे से जी उठेंगे
जनाज़ा उट्ठेगा अब किसी का न अब किसी का मज़ार होगा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere