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अख़्तर अंसारी

1909 - 1988 | अलीगढ़, भारत

व्यंग युक्त भावनात्मक तीक्ष्णता के लिए प्रख्यात

व्यंग युक्त भावनात्मक तीक्ष्णता के लिए प्रख्यात

अख़्तर अंसारी

ग़ज़ल 45

अशआर 26

याद-ए-माज़ी अज़ाब है या-रब

छीन ले मुझ से हाफ़िज़ा मेरा

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उस से पूछे कोई चाहत के मज़े

जिस ने चाहा और जो चाहा गया

हाँ कभी ख़्वाब-ए-इश्क़ देखा था

अब तक आँखों से ख़ूँ टपकता है

रोए बग़ैर चारा रोने की ताब है

क्या चीज़ उफ़ ये कैफ़ियत-ए-इज़्तिराब है

वो माज़ी जो है इक मजमुआ अश्कों और आहों का

जाने मुझ को इस माज़ी से क्यूँ इतनी मोहब्बत है

क़ितआ 74

रुबाई 24

पुस्तकें 39

चित्र शायरी 3

 

"अलीगढ़" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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