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अख़्तर सिद्दीक़ी

ग़ज़ल 1

 

शेर 1

तेरा हर राज़ छुपाए हुए बैठा है कोई

ख़ुद को दीवाना बनाए हुए बैठा है कोई

 

पुस्तकें 1

और ख़ून बहता रहा

 

1971