Akhtarul Iman's Photo'

अख़्तर-उल-ईमान

1915 - 1995 | मुंबई, भारत

आधुनिक उर्दू नज़्म के संस्थापकों में शामिल। अग्रणी फ़िल्म-संवाद लेखक। फ़िल्म ' वक़्त ' और ' क़ानून ' के संवादों के लिए मशहूर। फ़िल्म 'वक़्त' में उनका संवाद ' जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते ' , आज भी ज़बानों पर

आधुनिक उर्दू नज़्म के संस्थापकों में शामिल। अग्रणी फ़िल्म-संवाद लेखक। फ़िल्म ' वक़्त ' और ' क़ानून ' के संवादों के लिए मशहूर। फ़िल्म 'वक़्त' में उनका संवाद ' जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते ' , आज भी ज़बानों पर

नज़्म

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

इत्तिफ़ाक़

अख़्तर-उल-ईमान

उम्र-ए-गुरेज़ाँ के नाम

अख़्तर-उल-ईमान

उरूस-उल-बिलाद

अख़्तर-उल-ईमान

कार-नामा

नोमान शौक़

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

अख़्तर-उल-ईमान

गूँगी औरत

अख़्तर-उल-ईमान

डासना स्टेशन का मुसाफ़िर

अख़्तर-उल-ईमान

तस्कीन

नोमान शौक़

दूर की आवाज़

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

बिंत-ए-लम्हात

अख़्तर-उल-ईमान

मेरा दोस्त अबुल-हौल

अख़्तर-उल-ईमान

राह-ए-फ़रार

अख़्तर-उल-ईमान

शीशा का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

एक एहसास

नोमान शौक़

कल की बात

नोमान शौक़

ज़िंदगी का वक़्फ़ा

नोमान शौक़

मुकाफ़ात

नोमान शौक़

मस्जिद

नोमान शौक़

एक लड़का

आतिफ़ बलोच

ख़मीर

आतिफ़ बलोच

तब्दीली

नोमान शौक़

शीशा का आदमी

आतिफ़ बलोच

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI