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अलीम मसरूर

1926

ग़ज़ल 6

शेर 7

भीड़ के ख़ौफ़ से फिर घर की तरफ़ लौट आया

घर से जब शहर में तन्हाई के डर से निकला

जाने क्या महफ़िल-ए-परवाना में देखा उस ने

फिर ज़बाँ खुल सकी शम्अ जो ख़ामोश हुई

उठ के उस बज़्म से जाना कुछ आसान था

एक दीवार से निकला हूँ जो दर से निकला

पुस्तकें 4

Bahut Der Kar Di

 

1983

Bahut Der Kar Di

 

1983

Bahut Der Kar Di

 

1983

Bahut Der Kar Di

 

1972