अली मुज़म्मिल के शेर
ज़मीन-ओ-अर्श के बाहम तअ'ल्लुक़ के तनाज़ुर में
ज़मीन-ओ-अर्श का इदग़ाम हो जाने से डरता हूँ
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere