Ameen Hazin's Photo'

अमीन हज़ीं

1884 - 1967

अमीन हज़ीं

ग़ज़ल 6

शेर 4

नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला

उसी की आरज़ू ने मार डाला

तुझ को तिरी ही आँख से देख रही है काएनात

बात ये राज़ की नहीं अपना ख़ुद एहतिराम कर

रस्ते की ऊँच नीच से वाक़िफ़ तो हूँ 'अमीं'

ठोकर क़दम क़दम पे मगर खा रहा हूँ मैं

यूँ दिल है सर-ब-सज्दा किसी के हुज़ूर में

जैसे कि ग़ोता-ज़न हो कोई बहर-ए-नूर में

पुस्तकें 2

Gulbaang-e-Hayat

 

1940

Guldasta

 

1994